भारत में Crypto का भविष्य : Coinswitch के CBO शरण नायर के साथ फाइनेंस इंफ्लुएंसर प्रांजल कामरा के सवाल-जवाब


हम यहां कुछ सवाल-जवाब की झलक दे रहे हैं, जो हाल ही में CoinSwitch के Ask Me Anything सेशन में पूछे गए थे:

क्रिप्टो का आंतरिक मूल्य या इंट्रिन्सिक वैल्यू कैसे निकाल सकते हैं?

शरण :  मेरे हिसाब से आंतरिक मूल्य बहुत ही सब्जेक्टिव चीज है.  हो सकता है कि जो इंट्रिन्सिक वैल्यू मेरे लिए हो, वो वैल्यू किसी और के लिए मान्य न हो.  हालांकि,  मुझे लगता है कि बिटकॉइन और दूसरे क्रिप्टो असेट्स के इंट्रिन्सिक वैल्यू को इस सवाल के साथ देखना चाहिए कि इससे क्या सॉल्व हो रहा है? बिटकॉइन का वैल्यू इस आधार पर तय होता है कि इसका स्टोर वैल्यू है. अब, आज की तारीख में वैल्यू के मौजूदा स्रोत क्या हैं? यह सोना हो सकता है या प्रॉपर्टी भी विकल्प होता है. अब अगर आप बिटकॉइन की गोल्ड या प्रॉपर्टी से तुलना करेंगे तो आप देखेंगे कि बिटकॉइन ऐसी पोर्टेबल चीज़ है कि आप बिलियन डॉलर की वैल्यू का बिटकॉइन एक छोटे स्टोरेज डिवाइस में रख सकते हैं. और यह लिक्विड मनी है, गोल्ड और प्रॉपर्टी के मुकाबले इसमें आप जब भी चाहें इसके बदले में पैसे पा सकते हैं.

अब इन सारी चीजों को देखते हुए आप बिटकॉइन का मूल्यांकन कर सकते हैं. मैं फाइनेंस का बंदा नहीं हूं और (हंसते हुए) टेक का बंदा होने के नाते मैं तो इसकी वैल्यू ऐसे ही निकालूंगा.

क्या बिटकॉइन की लिमिटेड सप्लाई के आधार पर इसका स्टोर वैल्यू काफी है?

शरण : नहीं, लिमिटेड सप्लाई बिटकॉइन को स्टोर ऑफ वैल्यू देने के लिए काफी नहीं है. इसका बहुत कम महत्व रह जाता है क्योंकि आखिरकार आप किसी भी चीज लिमिटेड सप्लाई में बना सकते हैं. यहां तक कि मेरे फिंगरप्रिंट्रस भी लिमिटेड सप्लाई में हैं, लेकिन क्या उनकी कीमत अरबों डॉलर में हो सकती है? बिल्कुल नहीं. जैसा मैंने पहले कहा है कि बिटकॉइन हैरान करने वाली क्षमता रखता है. आमतौर पर लोग क्रिप्टो को प्राइस, वॉलेटिलिटी और स्पेकुलेशन के पहलुओं से देखते हैं, वो यह नहीं देखते कि क्रिप्टो इसके परे और भी बहुत कुछ है और इन्हीं सब कारणों से इनकी वैल्यू ऊपर जा रही है. और भी कई दूसरे फैक्टर्स, जैसे कि इसका इस्तेमाल और सीमाओं से परे दुनिया बनाने की संभावना इसकी वैल्यू और बढ़ा देते हैं.

अब इस्तेमाल की बात आई है तो, आप क्रिप्टो के दुरुपयोग को लेकर क्या कहेंगे?

शरण : अगर हम इंटरनेट का उदाहरण लें तो… जब यह शुरू हुआ था तो बहुत सी आलोचनाएं थीं, खासकर डार्क वेब के खिलाफ. ऐसी धारणा बनाई गई कि इंटरनेट ऐसी जगह है, जहां लोग बुरे से बुरे काम कर सकते हैं. उस वक्त लोगों के पास इस बारे में चिंता के स्वाभाविक कारण थे, और इसमें उनकी कोई गलती नहीं है. यहां तक कि मैं खुद भी शक्की हुआ करता था. क्रिप्टो के लिए हम नहीं कह सकते कि यह इतना फुलप्रूफ है कि इसके जरिए कोई गलत गतिविधि नहीं हो सकती है, लेकिन इतना निश्चित है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए यह कोई सुरक्षित जगह भी नहीं है. और ऐसा क्यों है? क्योंकि यह इकोसिस्टम ब्लॉकचेन पर ट्रांजैक्शन का परमानेंट रिकॉर्ड स्टोर रखता है- ये रिकॉर्ड न मिटाए जा सकते हैं, न ही बदले जा सकते हैं. तो अगर कोई भी फ्रॉडस्टर, किसी धोखाधड़ी को अंजाम देकर निकल जाता है, तो भी आगे चलकर वो पकड़े जाएंगे. आज या कल, उनको पकड़ने का रास्ता खुल जाएगा.

क्रिप्टो भविष्य के इंटरनेट को कैसे पावर अप करेगा?

शरण : अगर आज हम देखें तो पाएंगे कि कंज्यूमर्स कॉन्टेंट नहीं तय कर रहे हैं, बल्कि YouTube, Google, Spotify जैसे प्लेटफॉर्म्स के सेंट्रलाइज़्ड सर्वर, जो कॉन्टेंट स्टोर करते हैं, वो तय करते हैं कि कॉन्टेंट क्या हो. तो यह साफ है कि ये कंपनियां अपनी मर्जी और जरूरत के हिसाब से जो भी चाहें रिमूव कर सकती हैं प्लेटफॉर्म से, इसलिए Web 3.0 अहम हो जाता है.  यह सेंट्रलाइज्ड सिस्टम को हटा देगा और फिर यूजर्स के हाथ में होगा कि वो क्या क्रिएट और कंज्यूम करना चाहते हैं.  Web 3.0 का सर्वर डिसेंट्रलाइज़्ड होगा, जिसका मतलब है कि बहुत से लोग डिसेंट्रलाइज़ तरीके से इसमें पार्टिसिपेट कर सकते हैं और इनफॉर्मेशन को स्टोर कर सकते हैं. और इन लोगों के पार्टिसिपेट करने, यानी कि अपने कंप्यूटर पर डेटा स्टोर करने के लिए उनकी सहमति देने का मतलब है कि उन्हें इसके लिए इंसेंटिव मिलेगा, क्योंकि तब वो यह फ्री में क्यों करेंगे? और क्रिप्टो असेट्स को इंसेंटिव की तरह इस्तेमाल किया जाएगा.

Web 3.0 का एक गवर्नेंस मॉडल होगा, जहां लोग इसपर वोट कर सकेंगे कि कोई कॉन्टेंट गलत है या हिंसा या हेट स्पीच को बढ़ावा देता है. और वो वोट क्रिप्टो टोकन के माध्यम से रिप्रेंजेंट किया जाएगा. ये इस्तेमाल के कुछ तरीके हैं, जिनसे हम समझ सकते हैं कि  Web 3.0 में क्रिप्टो की भूमिका कितनी अहम होगी.

क्या वेब के भविष्य में निवेश करने का सबसे आदर्श तरीका है क्रिप्टो?

शरण : मान लीजिए कि आपके पास किसी बैंक का स्टॉक है, तो ये स्टॉक बैंक की परफॉर्मेंस के हिसाब से ऊपर-नीचे जाएगा. अब अगर आपको उस बैंक के बारे में कोई चीज पसंद नहीं है, चाहे मान लीजिए कि वो लैंडिंग पेज हो या उनके ऑपरेशन का तरीका, सच्चाई है कि आप इस बारे में कुछ नहीं कर सकते. ज़ीरो पार्टिसिपेशन है, आपकी कुछ नहीं चलती है, ऐसे में अगर कहीं बैंक दिवालिया हो जाए, तो आपका पैसा डूब जाए.

लेकिन, क्रिप्टो के साथ ऐसा सीन नहीं है. अगर आपने इसमें निवेश किया है, तो आप इस इकोसिस्टम के एक्टिव हिस्सा हैं. और सिस्टम ऐसा है कि फंक्शनिंग में बदलाव को लेकर आपका कोई सुझाव है तो आपको सुना जाएगा.

आपको क्या लगता है कि लोग क्रिप्टो से आकर्षित क्यों हो रहे हैं?

शरण : क्रिप्टो के बारे में जानने वाले हर ऐसे शख्स को जिसे मैं जानता हूं, उसने इसके प्राइस अप्रीसिएशन को लेकर ही इसके बारे में सुना है, और यही सच्चाई है. यह अपनी टेक्नोलॉजी को लेकर उतना फेमस नहीं है, जितना इतने कम समय में अपने प्राइस ग्रोथ को लेकर है, और इसीलिए लोग इस इंडस्ट्री की तरफ खिंचे हुए आ रहे हैं. 

इस कम्युनिटी का हिस्सा बनने के बाद लोगों ने पहले इसका स्वाद चखने के लिए थोड़े पैसे लगाए, इसके बाद वो लगातार सीखते रहते हैं, चाहे सोशल मीडिया पर ग्रुप्स जॉइन करके, या हमारा कॉन्टेंट देखकर, वो सीख रहे हैं तो वो रुकते हैं.

क्रिप्टो पर लग रहे 30 फीसदी टैक्स को आप कैसे देखते हैं?

शरण : यह तथ्य कि अब क्रिप्टो को टैक्सेशन के अंडर में लाया जा रहा है, इसको वैधता देने की ओर पहला कदम है. और अगर कुछ साल पहले क्रिप्टो की जो हैसियत थी, उसे देखा जाए तो  मुझे लगता है कि यह बड़ी बात है.

टैक्सेशन से लोगों में इसमें शामिल होने का कॉन्फिंडेस आएगा. अच्छी बात है कि अब हमें सरकार के इरादे पता हैं. कुछ लोगों का कहना है कि क्रिप्टो पर टैक्स लगाने का इसकी वैधता से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमने ऐसा कभी नहीं देखा कि किसी चीज को अवैध भी माना जाए और उसपर टैक्स भी लगाया जाए. तो मेरा यह पक्का विश्वास है कि टैक्सेशन ही आखिरकार रेगुलेशन का रास्ता भी तय करेगा और इसपर बैन लगाने का मतलब होगा, मानो इंटरनेट पर बैन लगाना.

हां, जितना टैक्स लग रहा है यानी- 30% टैक्स और Tax Deducted at Source (TDS)पर 1% का टैक्स- चिंता वाली बात है. बहुत से ट्रेडर्स इसे लेकर खुश नहीं थे.  लेकिन मुझे इस बात से भी शांति मिलती है कि हमारी सरकार सुनती है. हम आमतौर पर हमेशा टेक्नोलॉजी को स्वीकारने और रेगुलेट करने में पीछे रहते हैं, लेकिन इस मामले में भारत ने काफी तेजी दिखाई है, और मुझे इस बात की सच में बहुत खुशी है.

अगले पांच सालों में आप क्रिप्टो को कहां देखते हैं?

शरण : मैंने लोगों को क्रिप्टो को गैरकानूनी बताने और ये सुनने कि मैं पॉन्ज़ी स्कीम चला रहा हूं, से लेकर स्मार्ट से स्मार्ट लोगों को क्रिप्टो में पैसा लगाते हुए देखा है. ये देखकर अच्छा लगता है कि हमने इतना लंबा सफर तय किया है. सरकार को देखिए जो कोविड-19 वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट से लेकर जमीन के कागजात ब्लॉकचेन पर डाल रही है. तो अगर आज के हिसाब से देखें तो अगले पांच सालों में ये विकास इससे भी 10 गुना तेज गति से होगा, क्योंकि अब बहुत से लोग इसे शक की निगाह से नहीं देखते हैं, और अब आगे बढ़ने के लिए इसके पास जरूरत की सारी चीजें हैं. 

क्या आप हमेशा फाइनेंस सेक्टर में दिलचस्पी रखते थे?

शरण : इंटरनेट की एक कहावत है: I didn’t choose the thug life, the thug life chose me! खैर, क्रिप्टो मेरे लिए वैसा ही है. मैं भी जब क्रिप्टो की दुनिया में घुसा तो बहुत कुछ नहीं पता था. क्रिप्टो को लेकर मैं भी बहुत कम जानता था, लेकिन वक्त के साथ, ज्यादा से ज्यादा लोगों से बात करने के साथ-साथ मुझे सारे कॉन्सेप्ट्स समझ में आने लगे, और फिर मुझे इससे प्यार हो गया.

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के अलग-अलग तरीके के इस्तेमाल को लेकर आपकी क्या धारणा है?

शरण : ब्लॉकचेन लोगों की आम जिंदगी बदल देगा. इससे लोगों को पता चलेगा कि डिसेंट्रलाइजेशन क्यों इतनी अहमियत रखता है. बड़ी टेक कंपनियां आमतौर पर लोगों को एक बबल में रखते हैं, जिससे उनकी फैसला लेने की क्षमता प्रभावित होती है. डिसेंट्रलाइजेशन से वो ऐसी दुनिया में जा सकते हैं, जहां उनके फैसलों या कॉन्टेंट की पसंद को कोई प्रभावित नहीं कर सकता है.

डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) ने बैंकों के मुकाबले सेकेंडों में लोन लेने को आसान बना दिया है. और आप ऐसा अपनी पहचान उजागर किए बिना कर सकते हैं. ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की यही बात मुझे बहुत उत्साहित करती है.



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