Ethereum के जून में होने वाले अपग्रेड में देरी होने से इनवेस्टर्स निराश


बिटकॉइन और Ether दोनों की माइनिंग प्रूफ-ऑफ-वर्क के इस्तेमाल से होती है

खास बातें

  • इस अपग्रेड से Ether की माइनिंग में इलेक्ट्रिसिटी की खपत काफी घट सकती है
  • इससे ट्रांजैक्शंस की रफ्तार में तेजी आने की संभावना है
  • इथर के प्राइस में इस वर्ष तेजी आई है

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ether की ब्लॉकचेन Ethereum के जून में होने वाले अपग्रेड “Merge” में देरी होने से इनवेस्टर्स निराश हैं. इस अपग्रेड से Ether की माइनिंग में इलेक्ट्रिसिटी की खपत बहुत कम होने और इसकी ट्रांजैक्शन तेज होने और कॉस्ट घटने की उम्मीद है. इस वर्ष Ether में आई तेजी के पीछे भी यह एक बड़ा कारण था.डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंशियल डेटा प्लेटफॉर्म Masa Finance के फाउंडर और CEO Brendan Playford ने कहा, “इस अपग्रेड में देरी हो रही है. यह काफी जटिल है और यह पक्का नहीं है कि इससे ट्रांजैक्शन की रफ्तार बढ़ने और कॉस्ट कम होने का वादा पूरा होगा या नहीं.”

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Ethereum के प्रमुख डिवेलपर Tim Beiko के जून में अपग्रेड को टाले जाने की जानकारी देने के बाद पिछले महीने इसके प्राइस में 13 प्रतिशत की गिरावट आई थी. उन्होंने बताया था कि यह जून में नहीं होगा और इसके कुछ महीने बाद होने की संभावना है. 

Ether का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 363 अरब डॉलर का है, जो बिटकॉइन की मार्केट वैल्यू का आधे से भी कम है. क्रिप्टो मार्केट में इन दोनों क्रिप्टोकरेंसीज की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत की है. हालांकि, बिटकॉइन में डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस से जुड़ी एक्टिविटीज में कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए इस्तेमाल होने की कोई वास्तविक क्षमता नहीं है. इस कारण से बहुत से इनवेस्टर्स का मानना है कि इस मार्केट में बड़ा बदलाव हो सकता है. Ethereum को Merge के सफल होने से काफी फायदा मिल सकता है. Genesis Trading में मार्केट इनसाइट्स की प्रमुख Noelle Acheson ने कहा, “हम Merge से पहले  Ethereum में दिलचस्पी को बढ़ता देख रहे हैं. हालांकि, यह नहीं पता कि अपग्रेड कब होगा.” उन्होंने बताया कि इससे संकेत मिल रहा है कि Ethereum की वैल्यू कम है और इसमें बढ़ोतरी हो सकती है. 

बिटकॉइन और Ether दोनों की माइनिंग प्रूफ-ऑफ-वर्क के इस्तेमाल से होती है जिसमें हजारों माइनर्स या नेटवर्क नोड्स मैथमैटिक्स की जटिल पजल्स को सॉल्व करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं. इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रिसिटी की काफी खपत होती है और इससे पॉल्यूशन बढ़ता है. इसकी तुलना में प्रूफ-ऑफ-स्टेक तरीके से माइनिंग करने से इलेक्ट्रिसिटी की खपत काफी घट जाती है. Ethereum के इस तरीके को शुरू करने से इसकी प्रति सेकेंड ट्रांजैक्शंस कई गुना बढ़ने की उम्मीद है. इससे यह Solana और Cardano जैसे ऑल्टकॉइंस को टक्कर दे सकेगा जो इनवेस्टिंग,, ट्रेडिंग और नॉन-फंजिबल टोकन्स के लिए प्रूफ-ऑफ-स्टेक का आंशिक या पूरी तरह इस्तेमाल करते हैं. 



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